राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday

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राजस्थान के धार्मिक संत एवं सम्प्रदाय Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday

राजस्थान को बहु-धार्मिक समाज का आशीर्वाद प्राप्त है राजस्थान में कई खूबसूरत नुहा कलात्मक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं जो प्राचीन भारतीय जीवन शैली को दर्शाती हैं और वैदिक धर्म राज्य में प्राचीन काल से प्रचलित रहा है और सूर्य की पूजा कई समुदायों के लिए धार्मिक अभ्यास का केंद्र रही है

 Rajasthan Ke Sant Sampraday
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राजस्थान को राजपूताना (राजपूतों का देश) भी कहा जाता था यह पर्यटकों के आकर्षण और अच्छी पर्यटक सुविधाओं के साथ एक पर्यटन स्थल भी है भारत का यह ऐतिहासिक राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, विरासत और स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है राजस्थान का 70% से अधिक हिस्सा शाकाहारी है, जो इसे भारत में सबसे अधिक शाकाहारी राज्य बनाता है और राजस्थान  में बहुत से धार्मिक संत एवं सम्प्रदाय है Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday

वल्लभ सम्प्रदाय (पुष्टि मार्गीय सम्प्रदाय) Vallabha Sampraday

  • वल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना महाप्रभु वल्लभाचार्य ने की थी
  • वल्लभाचार्य राधा की पूजा करते थे
  • इस का प्रमुख केंद्र नाथद्वारा (राजसमन्द) है 
  • वल्लभ सम्प्रदाय के प्रमुख अनुयायी  ,मेवाड़ का राजसिंह और  किशनगढ़ का सावंत सिंह / नागरीदास थे

रामानन्दी सम्प्रदाय Ramanandi Sampradaya

  • रामानन्दी सम्प्रदाय प्रवर्तक रामानन्द जी है
  • इस संप्रदाय का नाम श्री संप्रदाय या ‘रामानंद संप्रदाय’ या ‘वैरागी संप्रदाय’ है।
  • इसका सांप्रदायिक मंत्र ‘ओम् रामाय नम:’ है।

निम्बार्क सम्प्रदाय Nimbarka Sampradaya

  • निम्बार्क सम्प्रदाय जिसे हम्सा संप्रदाय, कुमरा संप्रदाय, Catuḥ सना संप्रदाय और सनकादि संप्रदाय के रूप में भी जाना जाता है|
  • यह द्वैतवाद (द्वैत-अद्वैत) या “द्वैतवादी द्वैतवाद” का वैष्णव धर्मशास्त्र सिखाता है
  • निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी थे
  • इसके मुख्य ग्रन्थ वेदांत पारिजात भाष्य थे |

शैव सम्प्रदाय Shaivism

  • शैव संप्रदाय के अनुयायियों को “शैव” या “सैवित्स” कहा जाता है।
  •  इस सम्प्रदाय Shaivism के प्रमुख अनुयायी   मेवाड़ के गुहिल शासक है
  • शैव सम्प्रदाय की प्रमुख शाखाएँ : 
  1. कापालिक – भैरव को शिव का अवतार
  2. लिंगायत – वीर शैव सम्प्रदाय
  3. काश्मिरक
  4. पशुपति/पाशुपात – जिसके संस्थापक लकुलीश है।
  • शैव संप्रदाय की प्रमुख पीठ एकलिंगजी मंदिर उदयपुर में है

दादू सम्प्रदाय (परब्रह्मा सम्प्रदाय) Dadu Ji Sampradaya

  • दादू सम्प्रदाय के प्रवर्तक दादूदयाल है |
  • इस  सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ नारायण (जयपुर) में है
  • इस सम्प्रदाय का उपनाम कबीरपंथी सम्प्रदाय है
  • दादू सम्प्रदाय की प्रमुख शाखाएँ 
  1. खालसा – इसके संस्थापक दादूदयाल के बड़े पुत्र गरीबदास है।
  2. खाकी / नागा – इसके संस्थापक सुंदरदास है।
  3. उतराधा – राजस्थान के उत्तर दिशा में पाए जाने वाले दादू पंथी
  4. विरक्त – घुमक्कड़ दादू पंथी
  5. स्थानधारी – गेरुआ वस्त्र धारण करने वाले, ग्रहस्थ, सैनिक प्रवृति वाले, दादू पंथी
  • दादू पंथी सम्प्रदाय के सतसंग स्थल अलख-दरीबा कहलाते है।
  • दादूदयाल जी का जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ।

जसनाथी सम्प्रदाय Sant Jasnath

  • जसनाथी सम्प्रदाय राजस्थान के जोधपुर बिकानेर मंडलों में मौजूद सिद्ध संप्रदाय है।
  • इस सम्प्रदाय प्रवर्तक जसनाथ जी है
  • जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ  कतरियासर (बीकानेर) में है
  • इनके प्रमुख ग्रन्थ – सिंभूदडा तथा कोड़ा
  • इसकी प्रमुख 5 उप पीठ बमलू (बीकानेर) , लिखमादेसर (बीकानेर) ,पूनरासर (बीकानेर) , मालासर (बीकानेर) ,पांचला (नागौर)

 Rajasthan Ke Sant Sampraday

विश्नोई सम्प्रदाय Vishnoi Sampradaya

  • विश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक जांभोजी है |
  • इस सम्प्रदाय की प्रमुख केंद्र / पीठ – मुकाम तालवा (नोखा,बीकानेर)  स्थापना समराथल (बीकानेर) में है
  • विश्नोई सम्प्रदाय के प्रमुख ग्रन्थ – जम्भ सागर, जम्भवाणी, विश्नोई धर्म प्रकाश है 
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक  जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पीपासर (नागौर) में हुआ।
  • इस सम्प्रदाय के लोगो को नियम-29 नियम दिए जाते है |
  • विश्नोई सम्प्रदाय  वन तथा वन्य जीवों की सुरक्षा में अग्रणी है। Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday
  • इस सम्प्रदाय के प्रमुख स्थल 
  1. मुकाम –
  2. लालासर – लालासर (बीकानेर)
  3. रामडावास – रामडावास (जोधपुर)
  4. जाम्भोलाव – जाम्भोलाव (जोधपुर),
  5. जांगलू (बीकानेर), रोटू गांव (नागौर)
  6. समराथल

रसिक सम्प्रदाय (अग्रदेसी सम्प्रदाय)  Rasik Sampraday

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक अग्रदास जी है |
  • रसिक सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र रेवासा (सीकर) में है
  •  जन्म 17वी शताब्दी का उत्तरार्द्ध बताया जाता हैं

गौडीय सम्प्रदाय  Gaudiya Vaishnavism

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक चैतन्य महाप्रभु है |
  • राधा रमण मन्दिर वृंदावन में श्री राधा रमण जी का मन्दिर श्री गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के सुप्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है
  • इस सम्प्रदाय प्रमुख केंद्र / पीठ  गोविन्द देव जी का मंदिर (जयपुर) में है
  • गौडीय सम्प्रदाय प्रमुख अनुयायी कछवाहा वंश के शासक अपने को गोविन्द देव जी का दीवान मानते है।

लालदासी सम्प्रदाय  (Lal das Ji Sampradaya )

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालदास जी है |
  • लालदासी सम्प्रदाय की प्रमुख केंद्र / पीठ नगला (भरतपुर) में है
  • यह मेवात क्षेत्र की लोकप्रिय सम्प्रदाय है।
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालदास जी का जन्म धोली धूव गांव (अलवर ) में हुआ
  • लालदासी सम्प्रदाय के अन्य केंद्र धोली दूब (अलवर) ,शेरपुर (अलवर)  है
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालदास जी के गुरु तिजारा के सूफी संत गद्दन चिश्ती थे।

रामस्नेही सम्प्रदाय

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक रामचरण जी महाराज है |
  • रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख केंद्र / पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में थी
  • इसके प्रमुख ग्रन्थ अणर्भवाणी है
  • रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रमुख संत हरिरामदास, दरियाव जी,  रामदास जी, जैमलदास जी थे
  • इस सम्प्रदाय की चार शाखाऐं थी
  1. शाहपुरा (भीलवाडा)
  2. रैण (नागौर)
  3. सिंहथल (बीकानेर)
  4. खैडापा (जोधपुर)
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक रामचरण जी महाराज का जन्म का जन्म सोडाग्राम (टोंक) में हुआ।

चरणदासी सम्प्रदाय

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक चरणदास जी है |
  • चरणदासी सम्प्रदाय की  प्रधान पीठ दिल्ली में है।
  • इसके प्रमुख ग्रन्थ ब्रह्मज्ञान सागर, ब्रह्म चरित्र, भक्ति सागर, ज्ञान स्वरोदय है 
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक चरणदास जी का जन्म डेहरा गांव (अलवर) में हुआ।
  • यह सम्प्रदाय मेवात क्षेत्र में लोकप्रिय है

प्राणनाथी सम्प्रदाय

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक  प्राणनाथ जी है |
  • प्राणनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख केंद्र / पीठ पन्ना (मध्यप्रदेश) में है।
  • इसके प्रमुख ग्रन्थ कुलजम है

नाथ सम्प्रदाय (Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday)

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक नाथ मुनि है |
  • इस सम्प्रदाय की प्रमुख केंद्र/ पीठ महामंदिर (जोधपुर) है
  • नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख अनुयायी मानसिंह थे
  • इस सम्प्रदाय के शाखाएँ 
  1. माननाथी पंथ – जोधपुर
  2. बैराग पंथ – राताडुंगा (पुष्कर)
  • नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख संत आयसदेवनाथ (मानसिंह के गुरु) थे

शैवमत सम्प्रदाय

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक लकुलिश है |
  • शैवमत सम्प्रदाय चार  शाखाएँ 
  1. कापालिक
  2.  पाशुपत
  3. लिंगायत
  4. काश्मीरक
  • इस सम्प्रदाय के साधु तानित्रक विद्या का प्रयोग करते है।
  • शैवमत सम्प्रदाय के लोग दिन में अनेक बार भगवान शिव की पूजा -अर्जना  करते है

गुदड सम्प्रदाय (Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday)

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक संतदास जी है |
  • गुदड सम्प्रदाय के  प्रमुख केंद्र / पीठ दांतडा गाव (भीलवाड़ा) में है
  • इस सम्प्रदाय के लोग  संतदास जी गुदडी से बने वस्त्र पहनते थे।

निष्कंलक सम्प्रदाय

  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत माव जी है |
  • निष्कंलक सम्प्रदाय प्रमुख केंद्र / पीठ साबला (डूंगरपुर) है
  • इस सम्प्रदाय का प्रमुख  ग्रन्थ चोपड़ा है जो यह बागड़ी भाषा में है इसमें तीसरे विश्वयुद्ध की भविष्यवाणी है।
  • निष्कंलक सम्प्रदाय  के अन्य केंद्र बेणेश्वर धाम है |
  • इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक  जन्म – साबला ग्राम – आसपुर तहसील (डूंगरपुर) में है

अलखिया सम्प्रदाय (Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday)

  • अलखिया सम्प्रदाय के संस्थापक स्वामी लाल गिरी है |
  • इस सम्प्रदाय प्रमुख केंद्र /पीठ बीकानेर है
  • इसका अन्य केंद्र चुरू में है
  • इस सम्प्रदाय का प्रमुख  ग्रन्थ अलख स्तुति प्रकाश है

दासी सम्प्रदाय (Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday)

  • दासी सम्प्रदाय की संस्थापक मीराबाई (मूल नाम -पेमल) है |
  • इसकी  प्रधान पीठ- मेड़ता सिटी (नागौर) में है
  • इस सम्प्रदाय की संस्थापक का जन्म कुडकी ग्राम (नागौर) में हुआ।
  • दासी सम्प्रदाय ग्रन्थ  टिका राग गोविन्द, नरसी मेहता री हुंडी, रूकमण मंगल, गीत गोविन्द आदि

नवल सम्प्रदाय (Naval Sampraday )

  • नवल सम्प्रदाय के प्रवर्तक नवलदास जी है |
  • इस  सम्प्रदाय प्रमुख केंद्र / पीठ जोधपुर है
  • नवल सम्प्रदाय के अन्य केंद्र  हरसौलाव गाव है

राजा राम सम्प्रदाय (Raja Ram Sampradaya )

  • राजा राम  सम्प्रदाय के प्रवर्तक राजाराम जी है |
  • इसकी  प्रधान पीठ- शिकारपुरा (जोधपुर) में है
  • राजा राम सम्प्रदाय मारवाड़ क्षेत्र में लोकप्रिय है।
  • राजा राम सम्प्रदाय राजा राम जी पर्यावरण प्रेमी व्यक्ति थे

तेरापंथी सम्प्रदाय (Terapanthi Jain sampraday)

  • तेरापंथी  सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु स्वामी है |
  • इस सम्प्रदाय प्रमुख केंद्र / पीठ जोधपुर है
  • इसके अन्य केंद्र कंटालिया गाव, जोधपुर में है
  • तेरापंथी सम्प्रदाय के प्रमुख अनुयायी जैन श्वेताम्बर है

रूद्र सम्प्रदाय ( Rajasthan Ke Pramukh Sant Sampraday )

  • रूद्र सम्प्रदाय के प्रवर्तक विष्णु स्वामी या वल्लभाचार्य है |

यह भी पढ़े :– राजस्थान के प्रमुख आभूषण – Rajasthan Ke Aabhushan

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