राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत Rajasthan Ke Itihas Ke Pramukh Strot

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राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत Rajasthan Ke Itihas Ke Pramukh Strot

Rajasthan ke pramukh shilalekh :- भारत में राजस्थान राज्य का हजारों साल पुराना इतिहास है यह सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल था प्रारंभिक मध्ययुगीन काल में अजमेर के चौहानों, मेवाड़ के गुहिलोट और सिसोदिया, मारवाड़ के राठौड़ जैसे कई राजपूत राज्यों का उदय हुआ बाद में यह क्षेत्र मुगल साम्राज्य के अधीन हो गया। मुगलों ने राजपूत शासकों को उच्च पद दिए जो उनके साथ संबद्ध थे। हालांकि, कुछ राजपूत राज्यों ने मुगल आत्महत्या को स्वीकार नहीं किया और लगातार उनके साथ युद्ध कर रहे थे। 18 वीं शताब्दी में मुगल शासन प्रभावी रूप से समाप्त हो गया, राजस्थान में और मराठा प्रभाव क्षेत्र में बढ़ गया।

Rajasthan Ke Itihas Ke Pramukh Strot

और आज राजस्थान के अन्दर बहुत से इतिहास के स्त्रोत है जो  राजस्थान के इतिहास के बारे में जानकारी देते है और इस इन इतिहास के स्त्रोत को देखने बहुत दूर दूर से लोग देखने है और इनसे सबंधित परीक्षा में बहुत से प्रश्न उत्तर पूछे जाते है इसलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत Rajasthan Ke Itihas Ke Pramukh Strot के बारे में विस्तार से बतायेंगे | rajasthan history in hindi,

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राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत Rajasthan Ke Pramukh Strot hindi

Rajasthan Itihas ke Pramukh Strot :- 

कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति 

  • कीर्ति स्तम्भ भारत के राजस्थान के चित्तौड़गढ़ शहर में चित्तौड़ किले में स्थित एक 12 वीं शताब्दी का टॉवर है |
  • इसका निर्माण भार्गवला ने रावल सिंह के शासनकाल के दौरान किया था rajasthan history in hindi,
  • इस प्रशस्ति को दिसम्बर 1460 में कुम्भा के समय उत्कीर्ण करवाया गया ।

 राज प्रशस्ति

  • राजप्रशस्ति, 1676 ई. में महाराजा राजसिंह द्वारा स्थापित कराई गई |
  • यह संसार का सबसे बढा  शिलालेख है ।
  • छठी शिला में इसका संवत 1744 दिया हुआ है
  • इसका प्रत्येक शिलाखंड काले पत्थर से निर्मित है
  • इसके प्रथम 5 सर्गों में मेवाड़ का प्रारंभिक इतिहास दिया गया है।

श्रृंगी ऋषि का लेख

  • यह लेख राणा मोकल के समय का है ।
  • ये एकलिंगजी से कुछ दूरी पर श्रृंगी ऋषि नामक स्थान पर स्थित है ।
  • इसमें मोकल द्वारा कुण्ड बनाने और उसके वंश का वर्णन है ।

रणकपुर प्रशस्ति

  • रणकपुर प्रशस्ति का 1439 ईं में रणकपुर के चौमुखा मंदिर पर उत्कीर्ण करवाया गया ।
  • इसमें मेवाड के राजवंश धरणक सेठ के वंश एवं उसके शिल्पी का परिचय दिया गया है ।
  • इसमें कुम्भा की विजयी का वर्णन हैं तथा बप्पा एवं कालभोज को अलगअलग बताया गया है ।
  • रणकपुर पाली और राजसमंद जिलों की सीमा के पास सदरी से 9 किलोमीटर दूर है।

सच्चिया माता की प्रशस्ति

  • सच्चिया माता का मंदिर जोधपुर से 63 किमी दूर ओसियां में स्थित है
  • ये मंदिर जोधपुर जिले का सबसे बड़ा मंदिर है rajasthan history in hindi,
  • इस शिलालेख पर कल्हण एवं कीर्तिपाल का वर्णन है ।

घोसुण्डी शिलालेख

  • हाथीबाड़ा घोसुण्डी शिलालेख राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के पास हैं
  • इसकी भाषा संस्कृत है और लिपि ब्राह्मी है rajasthan history in hindi,
  • ये ब्राह्मी लिपि में, संस्कृत के प्राचीनतम शिलालेख हैं।
  • हाथीबाड़ा शिलालेख, नगरी गाँव से प्राप्त हुए थे

बिजौलिया शिलालेख 

  • बिजोलिया कलां भारत के राजस्थान राज्य में भीलवाड़ा जिले का एक शहर है।
  • इसकी औसत ऊंचाई 512 मीटर (1,680 फीट) है।
  • यह जिला बूंदी की सीमाओं के करीब है। यह दो द्वारों (उत्तर और दक्षिण) से घिरा हुआ है
  • 1170 ईं. का यह शिलालेख जेन श्रावक लोलक द्वारा बिजौलिया के पार्श्वनाथ मंदिर के पास एक चट्टान पर उल्कीर्ण करवाया गया ।
  • इस शिलालेख का रचयिता गुणभद्ग था  rajasthan GK Hindi
  • ये उपरमल नामक पठार पर स्थित है।

मानमोरी का शिलालेख rajasthan history and culture in hindi,

  • यह मान सरोवर झील ( चित्तौड़गढ़ ) के तट पर एक स्तम्भ पर उत्कीर्ण था
  • मान मोरी या राजा मौन को उनके वंश का अंतिम शासक कहा जाता है,
  • जिन्होंने चित्तौड़ में मानसरोवर झील का निर्माण करवाया था।
  • इस शिलालेख में अमृत मंथन का उल्लेख है  rajasthan history in hindi,

सांमोली शिलालेख 

  • समोली राजस्थान में उदयपुर जिले के कोटरा तहसील में एक गाँव है
  • यह अभिलेख 646 ईं के गुहिल शासक शिलादित्य के समय का है ।
  • सांमोली ( भोमट उदयपुर) लेख में मेवाड के गुहिल वंश के बारे में जानकारी मिलती है ।
  • समोली अभिलेख 646 ईं के गुहिल शासक शिलादित्य के समय का है ।

कुंम्भलगढ़ प्रशस्ति / शिलालेख

  • कुम्भलगढ़ प्रशस्ति या कुम्भलगड़ शिलालेख राजस्थान के राजसमंद जिले के कुम्भलगढ़ दुर्ग में स्थित कुम्भश्याम मंदिर में स्थित है
  • यह प्रशस्ति संस्कृत भाषा एवं नागरी लिपि में है
  • यह 5 शिलाओं में उत्कीर्ण है rajasthan GK Hindi

हर्षनाथ की प्रशस्ति

  • हर्षनाथ राजस्थान राज्य में सीकर जिले के निकट स्थित है।
  • इसमें चौहानों का वंशक्रम दिया हुआ है और यह प्रशस्ति 973 ईं की है
  • यह हर्षगिरि ग्राम के पास हर्षगिरि नामक पहाड़ी है,
  • यह लेख संस्कृत में है rajasthan history in hindi,

अपराजिता का शिलालेख

  • गुहिल शासक अपराजिता की विजयो एवं प्रताप का वर्णन हे ।
  • यह  661 ईं में यह नागदा गाँव के कुंडेश्वर मंदिर में मिला

नगरी का शिलालेख

  • यह चित्तौड़ के किले से 7-8 मील उत्तर में नगरी नाम का एक प्राचीन स्थान पर है।
  • इसमें नागरी लिपि में संस्कृत भाषा में 424 ईं में विष्णु पूजा का उल्लेख हैं ।
  •  इसकी सर्वप्रथम खोज 1872 ई. में कार्लाइल द्वारा की गयी थी।

मण्डोर का शिलालेख

  • मंडोर शिलालेख (685): मंडोर, जोधपुर की एक बावड़ी की शीला पर उत्कीर्ण है ।
  • मंडोर शिलालेख (861): मंडोर, जोधपुर के विष्णु मंदिर में स्थित है ।
  • इस शिलालेख से प्रतिहार वंशी शाशकों के बारे में जानकारी मिलती है ।

नांदसा यूप स्तम्भ लेख

  • यह अभिलेख भीलवाड़ा जिले मे भीलवाड़ा से 60 किमी दूर नांदसा गाॅव में एक तालाब में 12 फीट ऊॅचा और साढ़े पांच फीट गोलाई मेँ एक गोल स्तम्भ के रूप उत्कीर्ण है
  • स्तम्भ लेख की स्थापना सोग ने की ।

कणसवा का लेख

  • कणसवा  लेख सं. 795 का है
  • इसमें धवल नामक राजा का नाम है जो मौर्य वंशी राजा था.
  • कणसवा 738 ई. का शिलालेख कोटा के निकट मिला है ।

चाकसू की प्रशस्ति

  • चाकसू में गुहिल वंशीय राजाओं तथा उनकी विजयों का उल्लेख मिलता हैं।
  •  यह शिलालेख 813 ई. में चाकसू ( जयपुर ) में मिला हैं ।

चित्तौड़गढ़ का शिलालेख

  • हाथीबाड़ा घोसुण्डी शिलालेख राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के पास हैं
  • इस शिलालेख की भाषा संस्कृत है और लिपि ब्राह्मी है
  • ये शिलालेख वैष्णव धर्म से सम्बन्धित हैं rajasthan GK Hindi
  • यह  गुहिल शासकों की धार्मिक सहिष्णुता की नीति को बताया गया है ।

जैन कीर्ति स्तम्भ का लेख

  • यह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित है
  • जैन कीर्ति स्तंभ शिलालेख 13वीं सदी का है ।
  • इसमें जीजा के वंश तथा मंदिर का उल्लेख मिलता हैं ।

बीकानेर दुर्ग की प्रशस्ति

  • यह बीकानेर के दुर्ग के मुख्य द्वार पर स्थित है
  • इस प्रशस्ति में चीका से लेकर राव रायसिंह तक के शासकों की उपलब्धियों एव विजयी का वर्णन है ।

सिवाणा का लेख 

  • इसका निर्माण पंवार राजा भोज के पुत्र श्री वीरनारायण द्वारा 10 शताब्दी में करवाया गया था
  •  इस लेख में राव मालदेव (जोधपुर) की सिवाना विजय का उल्लेख है ।

किरांडू का लेख

  • किरांडू (बाडमेर) में प्राप्त इस शिलालेख में परमारों को उत्पस्ति ऋषि वशिष्ठ के आबू यज्ञ से बताईं है ।
  • किराड़ू को राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है, rajasthan ka itihas in hindi pdf,

चीरवा का शिलालेख 1273 ईं (उदयपुर)

  • चीरवे शिलालेख के समय मेवाड़ का शासक समर सिंह था।
  • चीरवा गांव उदयपुर से 8 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
  • एक मंदिर की बाहरी दीवार पर यह लेख लगा हुआ।
  • चीरवे शिलालेख में संस्कृत में 51 श्लोकों का वर्णन मिलता है।
  • चीरवे शिलालेख में गुहिल वंशीय, बप्पा, पद्मसिंह, जैत्रसिंह, तेजसिहं और समर सिंह का वर्णन मिलता है।

 रसिया की छत्री का शिलालेख ( 1274 ई. )

  • रसिया की छत्री का शिलालेख की एक शिला बची है जो चित्तौड़ के पीछे के द्वार पर लगी हुई है।
  • इस शिलालेख में नागदा और देलवाड़ा के गांवों का वर्णन मिलता है।
  • इसमें दक्षिणी पश्चिमी राजस्थान के पहाड़ी भाग की वनस्पति का चित्रण किया गया है |
  • इस शिलालेख से आदिवासियों के आभूषण वैदिक यज्ञ परंपरा और शिक्षा के स्तर की समुचित जानकारी का वर्णन मिलता है।

गंभीरी नदी के पुल का लेख

  • इस लेख में समर सिंह तथा उनकी माता जयतल्ल देवी का वर्णन मिलता है।
  • यह लेख महाराणाओं की धर्म सहिष्णुता नीति तथा मेवाड़ के आर्थिक स्थिति पर अच्छा प्रकाश डालता है।

आबू का लेख ( 1342 ई. )

  • इस लेख में बप्पा से लेकर समर सिंह तक के मेवाड़ शासकों का वर्णन किया गया है
  • इसमें  शिल्पी सूत्रधार का नाम कर्मसिंह मिलता है
  •  इस शिलालेख से लेखक का नाम शुभ चंद्र है

चित्तौड़ के पार्श्वनाथ के मंदिर का लेख (1278 ई. )

  • पार्श्वनाथ मंदिर, खजुराहो के सुंदर मंदिरों में से एक है।
  • इस लेख तेज सिंह की रानी जयतल्ल देवी के द्वारा एक पार्श्वनाथ के मंदिर बनाने का उल्लेख मिलता है।
  • हम्मीर का भीलों के साथ भी सफल युद्ध होने का उल्लेख किया गया है
  • चित्तौड़ के पार्श्वनाथ के मंदिर का लेख में लक्ष्मण सिंह और क्षेत्र सिंह की त्रिस्तरीय यात्रा का वर्णन मिलता है

देलवाड़ा का शिलालेख ( 1334ई. सिरोही )

  • देलवाड़ा का शिलालेख में कुल 18 पंक्तियां हैं
  • इसमें 8 पंक्तियां संस्कृत में और शेष 10 पंक्तियां मेवाड़ी भाषा में है
  •  इनके साथ इस लेख में टंक नाम की मुद्रा के प्रचलन का उल्लेख मिलता है

रायसिंह की प्रशस्ति ( 1593 में )

  • राव रायसिंह ने किले के भीतर एक प्रशस्ति लिखवाई जिसे अब रायसिंह प्रशस्ति कहते हैं
  • इस लेख के रचयिता जैन मुनि जइता है
  • राव रायसिंह लेख में बीका से रायसिंह तक के बीकानेर के शासकों की उपलब्धियों का वर्णन किया गया है

समिधेश्वर मंदिर का शिलालेख

  • समिधेश्वर मंदिर का शिलालेख की रचना- एकनाथ ने की थी
  • यह चित्तौड़ दुर्ग में है
  • इसमें सिसोदिया एवं परमार वंश की जानकारी मिलती है
  • इसमें मोकल द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर निर्माण का उल्लेख मिलता है
  • इस लेख में यह भी लिखा मिलता है कि महाराजा लक्ष्मण सिंह ने झोटिंग भट्ट जैसे विद्वानों को आश्रय दिया था।

पुरालेखागारिय स्त्रोत rajasthan GK Hindi

  • हकीकत बही- राजा की दिनचर्या का उल्लेख
  • हुकूमत बही – राजा के आदेशों की नकल
  • कमठाना बही – भवन व दुर्ग निर्माण संबंधी जानकारी
  • खरीता बही – पत्राचारों का वर्णन

साहित्यिक स्त्रोत

  • अचलदास खीची री वचनिका :- शिवदास गाडण
  • कान्हड़ दे प्रबन्ध :-पदमनाभ
  • पातल और पीथल :-कन्हैया लाल सेठिया
  • धरती धोरा री :-कन्हैया लाल सेठिया
  • लीलटास :-कन्हैया लाल सेठिया
  • रूठीराणी, चेतावणी रा चूंगठिया :-केसरीसिंह बारहठ
  • राजस्थानी कहांवता :-मुरलीधर ब्यास
  • राजस्थानी शब्दकोष :-सीताराम लालस
  • नैणसी री ख्यात: -मुहणौत नैणसी
  • मारवाड रे परगाना री विगत :-मुहणौत नैणसी
  • राजस्थानी साहित्य साहित्यकार
  • पृथ्वीराजरासो:- चन्दबरदाई
  • बीसलदेव रांसो:- नरपति नाल्ह
  • हम्मीर रासो:- जोधराज
  • हम्मीर रासो:- शारगंधर
  • संगत रासो:- गिरधर आंसिया
  • बेलिकृष्ण रूकमणीरी :- पृथ्वीराज राठौड़

संस्कृत साहित्य rajasthan history and culture in hindi,

  • पृथ्वीराज विजय :- जयानक (कश्मीरी)
  • हम्मीर महाकाव्य :- नयन चन्द्र सूरी
  • हम्मीर मदमर्दन :- जयसिंह सूरी
  • कुवलयमाला :- उद्योतन सूरी
  • वंश भासकर/छंद मयूख :- सूर्यमल्ल मिश्रण (बंूदी)
  • नृत्यरत्नकोष :- राणा कुंभा
  • भाषा भूषण: – जसवंत सिंह
  • एक लिंग महात्मय: – कान्ह जी ब्यास
  • ललित विग्रराज :- कवि सोमदेव

फारसी साहित्य

  • चचनामा :- अली अहमद
  • मिम्ता-उल-फुतूह :- अमीर खुसरो
  • खजाइन-उल-फुतूह: – अमीर खुसरों
  • तुजुके बाबरी (तुर्की) बाबरनामा: – बाबर
  • हुमायूनामा: – गुलबदन बेगम
  • अकनामा/आइने अकबरी: – अबुल फजल
  • तुजुके जहांगीरी: – जहांगीर
  • तारीख -ए-राजस्थान: – कालीराम कायस्थ
  • वाकीया-ए- राजपूताना: – मुंशी ज्वाला सहाय

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1 Comment
  1. FbsbBlalt says

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