राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ – Rajasthan Ki Janjatiya

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राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ -Rajasthan Ki Janjatiya hindi

Rajasthan Ki Janjatiya hindi राजस्थान में एक समृद्ध इतिहास और संस्कृति है, जो कि उनके शाही किलों और महलों या विभिन्न क्षेत्रों में फैली उनकी रहस्यमयी जनजातियों के रूप में है। यहाँ की जनजातियाँ एक दूसरे से बहुत अलग हैं और बाकी सभ्य आबादी से बहुत अलग विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं।

जबकि भील और मीना 1400 ईसा पूर्व तक आर्यों द्वारा आक्रमण किए जाने तक मानव जाति की शुरुआत से ही भूमि पर शासन करने वाली जनजातियों में से हैं और राजस्थान की जनजातियाँ आज दुबिया भर में प्रसिद्ध है क्योकि दुसरे देशो से लोग इनके रहन सहन को देखने आते है और कोई भी एग्जाम हो इन Rajasthan Ki Janjatiya hindi के बारे में जरुर  पुचा जाता है तो आज हम इस artical में आपको राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ के बारे में बतायेंगे |rajasthan ki janjatiya gk

भील जनजाति (Bhil Tribe)

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  • मुख्य रूप से उदयपुर ( Udaipur), डूंगरपुर(Dungarpur) और चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) जैसे क्षेत्रों में रहती है वैसे  भील दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जनजाति है
  •  भील जनजाति भीली भाषा बोलती है |
  • Bhiljanjati भील जनजाति की आबादी  राजस्थान (Rajasthan) में आदिवासी आबादी का 39% हिस्सा हैं।
  • भील शब्द की उत्पत्ति ‘बील’ से हुई है, जिसका अर्थ है ‘कमान’. … भील जनजाति राजस्थान की प्रमुख प्राचीन जनजाति है|
  • भीलों के घरों को कू कहा जाता है और भीलों के घरों को टापरा भी कहा जाता है |
  • गुजरात (Gujarat) के पश्चिमी तट के भीलों ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और सन 1825 में सेवरम के नेतृत्व में पुनः विद्रोह हुआ
  • भील जनजाति के लगभग 39 प्रतिशत लोग, जो राजस्थान में बनस्वारा (Banaswara) गाँव में बसते हैं |
  • भील जनजाति के लोग टोटम (कुलदेवता) की पूजा करते हैं।
  • घूमर भील जनजाति का पारंपरिक लोक नृत्य है।
  • इतिहासकार कर्नल टाॅड ने भीलों को “वनपुत्र” कहा है।
  • भीलों द्वारा पहने जाने वाले कपडे :-  ठेपाडा/ढेपाडा -भील पुरूषों की तंग धोती। खोयतू– भील पुरूषों की लंगोटी। फालूः– भील पुरूषों की साधारण धोती। पोत्याः- भील पुरूषों का सफेद साफा पिरियाः- भील जाति की दुल्हन की पीले रंग की साड़ी। सिंदूरी:- लाल रंग की साड़ी सिंदूरी कहलाती है। कछावूः- लाल व काले रंग का घाघरा

मीणा जनजाति (Meena Tribe)

  • मीणा भारत की प्राचीनतम जनजातियों में से है |
  • Meena janjati मीणा का शाब्दिक अर्थ ‘मछली’ है। मीणा ‘मीन’ धातु से बना है।
  • मीणा जनजाति की कुलदेवी जीणमाता (रैवासा, सीकर) है
  • यह जनजाति मुख्यतया जयपुर (Jaipur),लवर( Alwar), दौसा (Dausa), सवाई माधोपुर ( Sawai Madhopur), करौली में पाई जाती है |
  •  मीणाओं के 2 भाग हैं- 1. जमींदार 2. चैकीदार।
  • मीणाओं में बालविवाह होते हैं।
  • मीणा जाति का पवित्र ग्रन्थ मीनपुराण हैं, जिसकी रचना मीणाओं के गुरु मगरमुनि ने की थी|
  • मीणा अपनी उत्पति मत्स्य भगवान से ही मानते हैं|

गरासिया जनजाति (Garasia)

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  • गरासिया जनजाति राजस्थान के सिरोही ( Sirohi), उदयपुर (Udaipur) और पाली (Pali ) जिलों में पाई जाती है |
  • इस जनजाति को राजस्थान के गिर राजपूतों के रूप में भी जाना जाता है |
  •  यह जनजाति राजस्थान में अल्पसंख्यक जनजातियों में से एक है|
  • इस जन जाती द्वारा हर साल, मार्च के दौरान एक गौड़ मेला आयोजित किया जाता है |
  • गरासिया जनजाति के मुखिया को सहलोत कहते हैं।
  • इस जनजाति में सफेद रंग के पशुओं को पवित्र माना जाता है
  • गरासिया जनजाति  के घर “घेर” कहते है |
  • यह जनजाति गांव को “फालिया” कहती है |
  • इस जनजाति में कई प्रकार के विवाह होते है जैसे :- 
  1. मोर बांधिया विवाह ;- यह विवाह हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार होता है |
  2. पहराबना विवाह :- इस प्रकार के विवाह में फेरे नही लिए जाते है |
  3. ताणना विवाह :- इस विवाह में  न सगाई  की जाती है, न फेरे  किये जाते है
  • गरासिया जनजाति द्वारा सामुहिक रूप से की जाने वाली कृषि को हरीभावरीः कहा जाता है |
  • Garasia गरासिया जनजाति में प्रचलित मृत्युभोज की प्रथा को कांधिया कहा जाता है |
  • गरासिया जनजाति का नृत्य वालर, लूर, कूद, जवारा, मांदल, मोरिया है
  • गरासिया जनजाति अपने को चौहान राजपूतो का वंशज मानती है ये लोग शिव दुर्गा और भैरव की पूजा करते हैं|

साँसी जनजाति (Rajasthan Ki  Janjatiya hindi)

  • साँसी जनजाति भरतपुर (Bharatpur) जिले में निवास करती है।
  • यह खानाबदोश जीवन व्यतीत करने वाली जनजाति है।
  • साँसी जनजाति को दो भागों में विभजित किया गया है :-  बीजा- धनादय वर्ग  माला –गरीब वर्ग .
  • यह एक ऐसी जनजाति है जिसके अन्दर विधवा विवाह का प्रचलन नहीं है।
  • साँसी जनजाति द्वारा पीर बल्लूशाह का मेला आयोजित किया जाता है यहाँ मेला संगरिया में जून माह में आयोजित किया जाता है |
  • सांसी जनजाति के लोग हिन्दी भाषा बोलते हैं |
  • इस जनजाति जब दो खानाबदोश समूह संयोग से घूमते-घूमते एक स्थान पर मिल जाते हैं, तो सगाई हो जाती है।
  • इस जनजाति में युवक-युवतियों के वैवाहिक संबंध उनके माता-पिता द्वारा किये जाते हैं |

सहरिया जनजाति (Saharia tribe)

Rajasthan Ki Janjatiya hindi

  • Saharia tribe सहरिया जनजाति राजस्थान (Rajasthan) राज्य की सर्वाधिक पिछड़ी जनजाति होने के कारण भारत सरकार ( Government of India) ने राजस्थान (Rajasthan) राज्य की केवल इसी जनजाति को आदिम जनजाति समूह की सूची में रखा गया है।
  • सहरिया शब्द की उत्पति ‘सहर’ से हुई है जिसका अर्थ जगह होता है।
  • राजस्थान बारां जिले की किशनगंज (Kishanganj) तथा शाहाबाद (Shahabad ) तहसीलों में निवास करती है।
  • सहरिया जनजाति में मुखिया को कोतवाल कहते हैं।
  • Saharia tribe सहरिया जनजाति के गांव सहरोल कहलाते है।
  • सहरिया जनजाति के कुल देवता तेजा जी है |
  • इस जनजाति की कुल देवी कोडिया देवी है |
  • इस जनजाति के लोग स्थानांतरित खेती करते हैं।
  • सहरिया जनजाति द्वारा पहने जाने वाले वस्त्र निम्न है जैसे ;
  1. सलुकाः- पुरूषों की अंगरखी है।
  2. खपटाः- पुरूषों का साफा हैं।
  3. पंछाः- पुरूषों की धोती है।
  • इस जनजाति के लोग मदिरा पान भी करते हैं।
  • इस जनजाति के लोग जंगलो से कंदमूल एवं शहद एकत्रित कर अपनी जीविका चलाते हैं |

कंजर जनजाति (Kanjar) 

  • कंजर जनजाति (Kanjar)   झालावाड (Jhalawar), बारां (Baran), कोटा (Kota) ओर उदयपुर (Udaipur) जिलो में रहती है।
  •  यह जनजाति अपराध प्रवृति के लिए कुख्यात मणि जाती है।
  • कंजर जनजाति के मुखिया को पटेल कहते है |
  • ‘कंजर’ शब्द की उत्पति ‘काननचार’/’कनकचार’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘ जंगलो में विचरण करने वाला’.
  • कंजर कबीली देवी-देवताओं के साथ हिंदू देवी देवताओं की भी मनौती करते हैं।
  •  इस  जनजाति के लोग हनुमान और चौथ माता की पूजा करते है।
  • कंजर जनजाति (Kanjar)  के लोग कोई भी अपराध करने से पूर्व इश्वर का आशीर्वाद लेते हैं। उसको पाती माँगना कहा जाता है।
  •  माना जाता है की यह लोग हाकम राजा क प्याला पीकर कभी झूठ नहीं बोलते हैं।
  • इस जनजाति का मेला चैथर माता का मेला चैथ का बरवाड़ा -सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur) है |
  • माना जाता है की यह मेला “कंजर जनजाति का कुम्भ” कहलाता है।
  • कहा जाता है की कंजर जनजाति (Kanjar) के लोगो के घर में  दरवाजे पर किवाड़ नहीं होते हैं घरों में भागने के लिए पीछे की तरफ खिडकी होती है |
  • कंजर जनजाति (Kanjar)  प्रमुख नृत्य चकरी नृत्य होता है |

डामोर जनजाति (rajasthan ki janjatiya gk)

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  • डामोर जनजाति डूंगरपुर जिले की सिमलवाड़ा ने रहती है |
  • Damor डामोर जनजाति की पंचायत का मुखिया को मुखी कहते है |
  • माना जाता है की डामोर जनजाति के लोग अंधविश्वासी होते हैं।
  • इस जनजाति के लोग मांसाहारी होते है।
  • कहा जाता है की इनकी उत्पत्ति राजपूतों से मानी जाती है।
  • डामोर जनजाति द्वारा होली के अवसर पर चाडि़या उत्सव आयोजित किया जाता है |
  • डामोर जनजाति का मुख्ग्याय मेला रस रेवाड़ी का मेला है |

कथौडी जनजाति (Rajasthan Ki Janjatiya hindi)

  • कथौड़ी जनजाति राजस्थान ( Rajasthan) राज्य के उदयपुर ( Udaipur) जिले की कोटड़ा झालौड (Kotda Jhalod ) व सराडा तहसीलों में निवास करती हैं ।
  • कथौड़ी जनजाति का मुख्य व्यवसाय खेर के वृक्षों से कत्था तैयार करना है
  • कहा जाता है की यह जनजाति मूल रूप से महाराष्ट्र की है।
  • कथौड़ी जनजाति ले मुख्य  वाद्ययंत्र तारपी, पावरी (सुषिर श्रेणी के) है |
  • इसका मुख्य नृत्य मावलिया, होली है |

कालबेलिया Kalbelia

  • कालबेलिया जनजाति की सर्वाधिक आबादी राजस्थान के पाली जिले में रहती है |
  •  यह  लोग एक खानाबदोश जीवन बिताते हैं
  • इस जनजाति का मुख्य  व्यवसाय साँप पकडना है
  • कालबेलिया जनजाति  को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
  • इस जनजाति के अस्थाई आवास, जिन्हें डेरा कहा जाता है|
  •  इन लोगो को सपेरा, सपेला जोगी या जागी भी कहा जाता है।
  • कालबेलिया जनजाति का पारंपरिक नृत्य छाऊ है |
  • इस जनजाति का नृत्य यूनेस्को की विरासत लिस्ट में है |

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