राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजना Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

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राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजना Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

Rajasthan ki Sinchai Pariyojana राजस्थान भारत के अन्दर क्षेत्रफल के हिसाब से बहुत बड़े राज्यों में एक है  राजस्थान भारत का एक अर्ध शुष्क राज्य है इसी कारण से राजस्थान में सिंचाई के लिए जल संसाधनों का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है वर्तमान में राजस्थान में 100 प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ और लघु सिंचाई योजनाएँ हैं, जिनका कुल कमांड क्षेत्र लगभग 25 लाख हेक्टेयर है

Rajasthan ki Sinchai Pariyojana
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और राज्य के अन्दर बहुत से ऐसे इलाके भी है जंहा लोग पीने के पानी के लिए भी इन परियोजना के ऊपर निर्भर करते है  इसलिए राज्य के अन्दर बहुत सी नदी परियोजना और नहर परियोजना चल रही इस artical में हम आपको   राजस्थान की प्रमुख सिंचाई परियोजना के बारे में विस्तार से बतायेंगे |

इन्दिरा गांधी नहर जल परियोजना IGNP-

  • इंदिरा गांधी नहर भारत की सबसे लंबी नहर है |
  • पहले राजस्थान नहर के रूप में जाना जाता था, इसे 2 नवंबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इंदिरा गांधी नहर का नाम दिया गया था।
  • इंदिरा गांधी नहर जीवन रेखा/मरूगंगा भी कहा जाता है।
  • इंदिरा गांधी नहर की प्रारंभिक रूपरेखा इंजीनियर कंवरसेन ने बनाई थी ।
  • I.G.N.P. के  निर्माण का मुख्य उद्द्देश्य रावी व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है।
  • यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी परियोजना है
  • इन्दिरा गांधी नहर जल परियोजना IGNP का मुख्यालय (बोर्ड) जयपुर में है।
  • इस नहर का उद्गम पंजाब में फिरोजपुर के निकट सतलज-व्यास नदियों के संगम पर बने हरिके बैराज से होता है
  • I.G.N.P. पंजाब व हरियाणा में बहने के पश्चात राजस्थान हनुमानगढ के टिब्बी तहसील के खारा गांव से प्रवेश करती हैं
  • इस परियोजना से श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर को जलापूर्ति  की जाती है
  •  इस नहर की कुल लम्बाई 649 किमी है।
  • इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के दो भाग हैं 
  • इस परियोजना में वर्तमान में 3120 करोड़ रूप्यें खर्च हो चुके हैं।

  प्रथम भाग 

  • प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहा जाता है 
  • राजस्थान फीडर की लम्बाई 204 किमी -पंजाब 150 किमी. , राजस्थान – 35 किमी. , हरियाणा – 19 किमी.
  • यह  भाग राजस्थान हरिकै बैराज से हनुमानगढ़ के मसीतावाली हैड तक विस्तारित है।
  • नहर के इस भाग में  जल का दोहन नहीं होता है।
  • नहर के इस  चरण का कार्य 1958 से 1975 तक लगभग पूर्ण हो गया ।
  • इस भाग  द्वारा 5.7 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन हुआ ।
  • इस चरण की शाखाएं अनूपगढ़, सूरतगढ़, पूगल आदि

 द्वितीय चरण

  • इस भाग को मुख्य नहर कहा जाता है 
  • मुख्य नहर की लम्बाई 445 किमी. है।
  • इस भाग का निर्माण कार्य 31 दिसम्बर 1986 तक पूरा हुआ
  • द्वितीय चरण बीकानेर के पूगल क्षेत्र के सतासर गांव से प्रारम्भ होता है जो जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे में पूरा होता है इसलिए मोहनगढ़ कस्बे को इन्दिरा गांधी नहर का ZERO POINT कहते हैं।

भाखड़ा नांगल परियोजना (Rajasthan ki Sinchai Pariyojana)

  • राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा राज्य की संयुक्त परियोजना है
  • यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियाजना है
  • भाखड़ा नागल परियोजना परियोजना से राजस्थान को हिमालय की नदींयो से .21 MAF पानी मिलता हैं
  • भाखड़ा नांगल परियोजना में मुख्यत: दो बांध पंजाब के होशियारपुर जिले में भाखडा स्थान पर एक बांध जो 226 मीटर ऊँचा है दूसरा भांखड़ा से 12 किमी दूर नांगल स्थान पर 29 मीटर ऊँचा नांगल बांध बनवाया गया ।
  • भाखड़ा बांध देश का सबसे ऊंचा बांध हैं।
  • भाखड़ा नांगल परियोजना  सबसे ज्यादा लाभ हनुमानगढ जिले को होता है |
  •  इस परियोजना से राजस्थान के श्री गंगानगर व हनुमानगढ़ चुरू जिलों को जल व विधुत एवं श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चुरू, झुँझुनू, सीकर बीकानेर को विद्युत की आपूर्ति होती है।
  • नांगल बांध से निकाली गई हैं, जो पंजाब, हरियाणा व राजस्थान को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है ।
  • भाखड़ा मुख्य नहर पंजाब के रोपड़ से निकलती है जो यह हरियाणा के हिसार के लोहाणा कस्बे तक विस्तारित है। इस नहर की कुल लम्बाई 175 कि.मी. है।

व्यास परियोजना

  • व्यास परियोजना राजस्थान पंजाब हरियाणा की संयुक्त परियोजना है
  • रावी और व्यास नदियों के जल का उपयोग करने के लिये इस परियोजना  को शुरु किया गया है
  • व्यास परियोजना से IGNP में नियमित जलापूर्ति रखने में मदद मिलती है।
  • इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया गया।
  1.  प्रथम चरण में व्यास सतलज लिंक नहर बनाई गयी
  2. द्वितीय चरण पोंग बाँध बनाया गया है जिस से इन्दिरा गांधी नहर में नियमित जलापूर्ति रखने में मदद मिलती है।
  • इस परियोजना के ऊपर बहुत ज्यादा विवाद हुए क्योकि  राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मु – कश्मीर, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश राज्यों के बीच एक समझौता हुआ इसमें सभी राज्यों के लिए अलग- अलग पानी की मात्रा निर्धारित की गई इस बटवारे को लाकर कई बारी विवाद हो चुके है Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

 चम्बल परियोजना (Rajasthan ki Sinchai Pariyojana)

  • यह परियोजना राजस्थान एवं मध्यप्रदेश राज्यो के सहयोग से बनाई गयी है |
  • चम्बल परियोजना 1952 -54 में शुरु की गयी थी
  • इस परियोजना के तीन बाँध है |
  1. गांधी सागर बाँध
  2. Maharana Pratap राणा प्रताप सागर बाँध
  3. कोटा बाँध
  •  गांधी सागर बाँध 
  1. गांधी सागर बाँध 1960 में मध्यप्रदेश की भानपुरा तहसील में भानपुरा से 33 कि.मी. दूर और मध्यप्रदेश के चौरासीगढ से 8 कि.मी. दूर जहाँ घाटी की चौड़ाई कम है|
  2. ये बांध चौरासीगढ़ में 8 कि.मी. पहले एक घाटी में बना हुआ है
  3. गांधी सागर बाँध 514 मीटर लम्बा एवं 62.17 मीटर ऊँचा है
  4. इस बांध के ऊपर 5 मीटर चौडी़ सडक़ बनायी गयी है
  5. मध्यप्रदेश में इस बांध  से 2 नहरें निकाली गई है।
  • राणा प्रताप सागर बाँध
  1. राणा प्रताप सागर बाँध चित्तौड़गढ़ में चूलिया जल प्रपात के समीप रावतभाटा नामक स्थान पर 1970 में बनाया गया है।
  2. Maharana Pratap राणा प्रताप सागर बाँध 1143 मीटर लम्बा और 53.9 मीटर ऊँचा है
  3. इस बांध द्वारा बनाने वाले जलाशय का क्षेत्रफल 113 वर्ग कि.मी. है
  4. यहां एक Power House गृह भी बनाया गया है।
  • कोटा बाँध
  1. 1960 के चंबल घाटी परियोजना के तहत बनने वाला यह चौथा बांध था।
  2. इस बांध की कुल भंड़ारण क्षमता 99 मिमी. क्‍यूव है।
  3. यह बांध 27,332 वर्ग किमी. के जलग्रहण क्षेत्र में फैला हुआ है।

जवाई बाँध परियोजना (Rajasthan ki Sinchai Pariyojana)

  • जवाई बाँध का निर्माण सन् 1946 में जोधपुर रियासत के महाराजा उम्मेद सिंह ने पाली में सुमेरपुर एरिनपुरा के पास स्टेशन से 2.5 कि.मी. की दूरी पर करवाया था
  • इसको मारवाड़ का ‘अमृत सरोवर‘ भी कहते हैं
  • इस बाँध 13 मई 1946 को शुरू करवाया, 1956 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ
  • इस बांध के जीर्णोद्धार का कार्य 4 अप्रैल 2003 को शुरू किया गया।
  • जवाई बांध में 9 अगस्त 1977 को सेई का पानी पहली बार डाला गया
  • इस बांध में पानी की आवक कम होने पर इसे उदयपुर के कोटड़ा तहसील में निर्मित सेई परियोजना से जोड़ा गया था
  • सबसे पहले जवाई बाँध को अंग्रेज इंजीनियर एडगर और फर्गुसन के निर्देशन में शुरू करवाया बाद में मोतीसिंह की देखरेख में बांध का कार्य पूर्ण हुआ
  • ये बांध लूनी नदी की सहायक जवाई नदी पर पाली के सुमेरपुर में बना हुआ है। इससे एक नहर और उसकी शाखाएं निकाली गयी हैं

नर्मदा परियोजना(Narmada Project)

  • नर्मदा बाँध परियोजना मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान की संयुक्त परियोजना है।
  • यह  राजस्थान की पहली परियोजना है जिसमें सम्पूर्ण सिंचाई ‘‘फव्वारा पद्धति’’ से होती है |
  • फरवरी 2008 को वसुंधरा राजे ने जल प्रवाहित किया
  • इस जल को लेने के लिए गुजरात के सरदार सरोवर बांध से नर्मदा नहर(458 कि.मी. गुजरात + 75 कि.मी. राजस्थान) निकाली गई है।
  • यह नहर जालौर जिले की सांचैर तहसील के सीलू गांव में राजस्थान मं प्रवेश करती है।
  • इस परियोजना में राजस्थान के लिए 0.5 एम. ए. फ.(मिलियन एकड़ फीट) निर्धारित की गई है।
  • नर्मदा बाँध नहर की गुजरात में कुल लम्बाई 458 किमी. तथा राजस्थान मे 74 किमी. लम्बाई है ।
  • इस नहर से जालौर व बाड़मेर की गुढ़ामलानी तहसील लाभान्वित होती है।
  • इसको मारवाड़ की भागीरथी कहा जाता हैं। Rajasthan ki Sinchai Pariyojana

लखवार बांध परियोजना ( Lakhwar Dam Project)

  • लखवार बांध परियोजना शुरु में उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान, उत्‍तराखंड , हरियाणा , दिल्‍ली, हिमाचल प्रदेश, दिल्‍ली की संयुक्त परियोजना  थी |
  • लेकिन कुछ कारणों के करना इस राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया, जिसके तहत 90 फीसद धन केंद्र सरकार खर्च करेगी और बाकी दस फीसदी राज्य करेंगे।
  • लखवाड़ परियोजना के अंतर्गत उत्‍तराखंड में देहरादून जिले के लोहारी गांव के नजदीक यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनना है।
  • परियोजना के तहत बनने वाली पूरी 300 मेगावाट बिजली उत्तराखंड को मिलेगी |
  • जिस पर लगभग 1400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह खर्च उत्तराखंड उठाएगा।
  • लखवार बांध परियोजना के निर्माण का कार्य उत्‍तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड करेगा।
  • लखवार बांध परियोजना से दिल्ली को पेयजल मिलेगा |
  • उत्‍तर प्रदेश, राजस्‍थान, उत्‍तराखंड , हरियाणा , दिल्‍ली, हिमाचल प्रदेश, दिल्‍ली राज्यों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
  • लखवार बांध परियोजना की कुल लागत 3966.51 करोड़ है

गंगनहर परियोजना (Gangnahar Project)

  • गंगनहर परियोजना भारत की प्रथम नहर सिंचाई परियोजना है
  • Gangnahar Project  गंगनहर का उद्घाटन 26 अक्टूबर 1927 को वॉयसराय लार्ड इरविन द्वारा शिवपुर हैड ( फतुई-श्रीगंगनगर ) पर किया गया ।
  • इस नहर की कुल लम्बाई 129 किलोमीटर है जिसमे राजस्थान में इसकी लम्बाई 17 किलोमीटर हैं और पंजाब में इसकी लम्बाई 112 किलोमीटर है ।
  • Gangnahar Project गंगनहर की आधारशिला फिरोजपुर हैडबाक्स पर 5 सितम्बर 1921 को महाराजा गंगासिंह द्वारा रखी गई।
  • गंगनहर की वितरिकाओं सहित कुल लम्बाई 1280 किलोमीटर है । गंगनहर की प्रमुख शाखाएं लक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़, करणजी और समेजा है ।
  • गंगनहर को गंगानगर की जीवनदायिनी के उपनाम से जाना जाता है
  • यह नहर सतलज नदी से पंजाब के फिरोजपुर के हुसैनीवाला से निकाली गई है
  • यह नहर राजस्थान के श्री गंगानगर के संखा गांव में प्रवेश करती है और शिवपुर, श्रीगंगानगर, जोरावरपुर, पदमपुर, रायसिंह नगर, स्वरूपशहर, होती हुई यह अनूपगढ़ तक जाती है।

गुडगाँव नहर परियोजना

  • गुडगाँव  नहर हरियाणा व राजस्थान की संयुक्त नहर है
  • Gurugram नहर परियोजना का कार्य 1966 मे शुरू हुआ जो 1985 में वनकर तैयार हुई
  • इस नहर से भरतपुर जिले की कामा व डीग तहसीलों में सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध होगी ।
  • गुडगाँव नहर की राजस्थान में कुल लम्बाई 58 किमी है
  • Gurugram गुडगाँव नहर से भरतपुर जिले को 33959 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है ।
  • गुडगाँव नहर का निर्माण का प्रमुख लक्ष्य यमुना नदी के पानी का मानसून काल में उपयोग करना है ।
  • आजकल इसे यमुना लिंक परियोजना कहते हैं।

रेणुकाजी डैम परियोजना (Rajasthan ki Sinchai Pariyojana)

  • दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान की सयुंक्त परियोजना है
  • डैम का निर्माण से इन छह राज्यों में पेयजल आपूर्ति की जरूरतों को देखते हुए किया जा रहा है।
  • डैम यमुना और उसकी दो सहायक नदियों गिरि और टोंस पर बनाया जाएगा।
  • इस परियोजना से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
  • रेणुकाजी डैम परियोजना पर आने वाले खर्च के बड़े हिस्से का वहन केंद्र सरकार करेगी, जबकि राज्यों को केवल 10 प्रतिशत देना होगा।
  •  यह 148 मीटर ऊँचे  पत्थर के बांध से 23 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड पानी दिल्ली और अन्य बेसिन राज्यों को दिया जा सकेगा

बीसलपुर परियोजना (Rajasthan ki Sinchai Pariyojana)

  • बीसलपुर परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है।
  • इस  परियोजना को चलाने के के लिए NABRD के RIDF से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है
  • बीसलपुर परियोजना से अजमेर, जयपुर, टोंक में जलापूर्ति होती है
  • इससे दो नहरें भी निकाली गयी है।
  • बीसलपुर बांध राजस्थान के टोंक जिले में बनास नदी पर बना है।
  • यंहा भगवान गोकर्णेश्वर का प्राचीन मंदिर है
  • बीसलपुर बाँध दो चरणों में बनाया गया। पहले चरण का उद्देश्य गाँव के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करवाना था  दूसरे चरण का उद्देश्य सिंचाई की सुविधाओं में सुधार लाना था
  • बीसलपुर बाँध 574 मीटर लंबा और 39.5 मीटर ऊँचा है।

 ईसरदा परियोजना

  • ईसरदा बाँध राजस्थान के टोंक, सवाई माधोपुर जिले में एक निर्माणाधीन बाँध परियोजना है।
  • यह परियोजना बनास नदी के अतिरिक्त जल को लेने के लिए बनाई जा रही है |
  •  इसे सवाईमाधोपुर, टोंक, जयपुर की जलापूर्ति के लिए बनाया जा रहा है |

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2 Comments
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