राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा – Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

0

राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा -Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi राजस्थानी वेशभूषा (राजस्थानी पहनावा) राजस्थान बहुत अनोखा है अन्य पारंपरिक परिधानों के साथ तुलना करने के लिए राजस्थान की पोशाक बहुत आकर्षक है भारतीय राजस्थान राज्य के अन्दर रंगीन त्योहारों, वेशभूषा और लोक गीतों और नृत्यों की एकता है। राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा बहुत रंगीन हैं और बाकी राज्यों की अन्य पारंपरिक वेशभूषा से काफी अलग हैं और राजस्थान राज्य के अन्दर  वहीं शहरी लोगों की वेशभूषा ग्रामीण लोगों से अलग होती है

 Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

जो निवासियों की भावना, उनके धर्म और संस्कृति को दर्शाते हैं। यह केवल यह देखने के लिए असाधारण है कि वे अद्वितीय और शानदार कपड़े कैसे पहनते हैं। पुरुषों और महिलाओं दोनों ने भारत के इस उत्तर-पश्चिमी राज्य के महान वातावरण को दिखाने के लिए रंगीन और खूबसूरती से डिजाइन की गई वेशभूषा धारण की और राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा दुनिया में प्रसिद्ध हो चुकी है आज इस artical में आपको राजस्था के पारंपरिक वेशभूषा के बारे में विस्तार से बतायेंगे |

राजस्थान के प्रमुख आभूषण – Rajasthan Ke Aabhushan

Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

  Pagri (पगड़ी)

 Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

  • पगड़ी राजस्थान की शान मानी जाती है क्योकि पगड़ी प्रतिष्ठा को प्रतिष्ठा प्रतिक माना जाता है।
  • पगड़ी को पाग, पेंचा व बागा भी कहते है।
  • राजस्थान में पगड़ी विभिन्न प्रकार की होती है जैसे :-
  1. मोठडा पगडी :- विवाह पर पहनी जाने वाली पगड़ी कहलाती है।
  2. लहरिया :- श्रावण मास में पहनी जाने वाली पगड़ी कहलाती है।
  3. राजशाही पगड़ी :- जयपुर की लहरिया पगड़ी को कहते हैं।
  4. पगड़ी मदील :- दशहरे के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी कहलाती है।
  5. पगड़ी केसरिया :- दीपावली के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी कहलाती हैं
  6. फूल पती पगडी :- फूल पती की छपाई वाली पगडी होली, के अवसर पर पहनी जाती है।
  7. मोटी पट्टेदार पगड़ी : – सुनार आँटे वाली पगड़ी पहनते थे तो बनजारे मोटी पट्टेदार पगड़ी काम में लाते थे।
  • पगड़ियों के मुख्य रंग :- जैसे-  कसूमल, कस्तूरिया, गुलनार, मोठड़ा, बूंटीदार, केरी भांत, तोरी-फूली, सिन्दूरिया, फागुणियां, सुआपंखी, अमरसिया, आभावरणी सोसनी, जवाई, फूल बुआड़ी, मलयागिरी, समदर लहर, राजाशाही, बीदामी, किरमची रंग आदि
  • पगड़ी बांधने वाले को छाबदार कहते है
  • विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी बागौर संग्रहालय (उदयपुर) में रखी हुई है।
  • तुर्रे, सरपेच, धुगधुगी का प्रयोग पगड़ियों में होता है।
  • बहुत सी रियासती पगडि़यां है जैसे : – 1 जसवंत शाही 2 चुड़ावत शाही 3 भीम शाही 4 उदयशाही 5 मानशाही 6 राठौडी 7 हम्मीर -शाही 8 अमरशाही 9 स्वरूपशाही 10 शाहजहांनी 11 राजशाही

अंगरखी

  • पुरुषों के शरीर के उपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र को अंगरखी/ बुगतरी कहते है।
  • एक कपड़ा है जो ज्यादातर कपास से बना होता है।
  • अंगरखी के अन्य बहुत से नाम है जैसे :  बुगतरी, अचकन, बण्डी, तनसुख, दुतई, गाबा, गदर, मिरजाई, डोढी, कानो, डगला आदि।

चौगा

  • राजस्थानी पुरुषों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र है
  • यह अगरखी के ऊपर पहने जाने वाला वस्त्र है।
  • तनजेब व जामदानी के चौगे- गर्मियों में पहने जाते है।

जामा

  • राजस्थानी पुरुषों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र है
  •  यह शादी- विवाह या युद्ध जैसे विशेष अवसरों पर घुटनों तक पहना जाता था |

आत्मसुख

  • आत्मसुख सर्दी से बचाव के लिए अंगरखी पर पहना जाने वाला वस्त्र है।
  • राजस्थानी पुरुषों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र है
  • सबसे पुराना आत्मसुख सिटी पैलेस (जयपुर) में सुरक्षित है।

पटका

  • जामा के ऊपर पटका/कमरबंद/कटिबन्ध बांधने की प्रथा थी, जिस पर तलवार या कटार लटकाई जाती थी।
  • राजस्थानी पुरुषों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र है |
  • पटका उच्च वर्गों के लोगों द्वारा पहना जाने वाला एक वस्त्र था
  • शाही परिवार सूती कपड़े से बने होते थे जिनकी माप लगभग 1.5 मीटर थी

खोयतू

  • लंगोटिया भीलों में पुरूषों द्वारा कमर पर बांधी जाने वाली लंगोटी।

धोती

  • धोती कपड़े का एक टुकड़ा है
  • इसका  का उपयोग शरीर के निचले हिस्से को ढंकने के लिए किया जाता है।
  • धोती को नियमित पहनने के रूप में उपयोग किया जाता है जो आमतौर पर रंग में सफेद होते हैं।

राजस्थानी महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले वेशभूषा ( Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi)

 Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi

ओढ़नी ( Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi)

  • ओढनी राजस्थान की पारंपरिक पोशाक है |
  • यह कपड़े का एक लंबा टुकड़ा होता है |
  • शरीर के निचले हिस्से मे घाघरा ओर ऊपर कूर्ती, कांचली के बाद स्त्रियां ओढली ओढ़ती है।
  • ओढनी भी कई प्रकार की होती है जैसे :-
  1. लूंगडी (Lungdi) – मीणा जाति से संबंधित है।
  2. पोमचा (Pomacha)- पीली व गुलाबी जमीन वाली विशेष ओढनी बच्चे के जन्म के समय महिलाएं ओढती है।
  3. लहरिया (Corrugated)- तीज-त्यौहार के अवसर पर महिलाओं पहने जाने वाली ओढनी है।
  4. कटकी(Ktki) – अविवाहित बालिकाओं की ओढनी है।
  5. चीड़ का पोमचा :- हाडौती क्षेत्र में विधवा स्त्री द्वारा पहने जाने वाली काले रंग की ओढ़नी।

कुर्ती

  • शरीर के ऊपरी हिस्से में स्त्रियों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र।
  • इसको कई नाम से जाना जाता है जैसे :-कापड़ी,कुर्ती-कांचली आदि
  • कापड़ी – कपडे के 2 टुकड़ो को जोड़ कर बनायीं गयी चोली जो पीठ पर तनियों से बाँधी जाती है।
  • स्त्रियों द्वारा शरीर के उपरी हिस्से हिस्से में पहने जाने वाले वस्त्र को कुर्ती-कांचली कहा जाता है

साळू

  • सधवा स्त्रियों के ओढ़ने का सुंदर व कीमती वस्त्र।

साड़ी ( Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi)

  • स्त्रियों द्वारा पहने जाने वाला वस्त्र
  • साड़ियों के नाम – चोल, निचोल, पट, दुकूल, अंसुक, वसन, चीर – पटोरी, चोरसो, ओड़नी, चूँदड़ी, धोरीवाला, साड़ी आदि
  1. आदिवासी महिलाओं द्वारा पहने जाने वाली  साड़ी को जाम साई कहते है।
  2. मराठी अंदाज में पहनी गयी साड़ी को फड़का कहते है |
  3. कोटा डोरिया साड़ी  कोटा की प्रसिद्ध साडी है |

सिंदूरी

  • भील महिलाओं द्वारा पहने जाने वाली लाल रंग की साड़ी है।

घाघरा

  • ज्यादातर राजस्थानी महिलाएं घाघरा पहनती हैं|
  •  जो एक लंबी स्कर्ट होती है जो एक पतली कमर तक टखने तक पहुंचती है
  • यह भी अलग अलग प्रकार के होते है जैसे :-
  1. लंगेटिया भील महिलाओं द्वारा घुटने तक पहना जाने वाला नीचा घाघरा  जिसे कछावू कहते है |
  2. आदवासी स्त्रियों द्वारा पहना जाने वाला काले रंग का घाघरा जिसे रेनसाई कहते है |

रेनसाई ( Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi)

  • लहंगे की छींट

पिरिया

  • भील स्त्रियों के द्वारा पहने जाने वाले पीले रंग के लहंगे को पिरिया कहते है।

तिलका ( Rajasthan Ki Veshbhusha Hindi)

  • तिलका मुस्लिम महिलाओं का पहनावा है।

यह भी पढ़े :राजस्थान के प्रमुख मेले Rajasthan Ke Pramukh Mele

Rajasthan GK Book:- Buy Now

उम्मीद है हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपके काम आयेगी यदि जानकारी अच्छी लगे तो शेयर और कमेंट करना ना भूले

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Translate »